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मनोज माही की कविता

होली हुरदंग होली के दिन में हुरदंग देखिये, भरती पिचकारी में रंग देखिये । मस्ती में पिसती भंग देखिये, खिजाबी जुल्फों का रंग देखिये । बूढ़े और बूढ़ी को तंग देखिये, घूंट- घूंट कर जीने का ढंग देखिये । पचपन भी दीखे बचपन के संग, बुढिया भी दीखे गुडिया के रंग । दुल्हन नवेली उमंग […]