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2020 बिहार विधानसभा चुनाव में किसके सर होगा भाजपा का केसरिया ताज

जैसे जैसे चुनाव नजदीक आते जा रहे बिहपुर विधानसभा में चुनावी सरगर्मी बढती जा रही है । बिहपुर विधानसभा हमेशा ही भाजपा के लिए जितना बड़ा हीं कठिन रहा है । बिहपुर से कई लोग भाजपा से भाग्य आजमा चुके पर सफलता 2010 के चुनाव में कुमार शैलेंद्र के हाथ लगी । हलांकी जीत का अंतर महज 465 का हीं रहा । और फिर 2015 के चुनाव में बड़े भारी अँतर से राजद ने एकबार फिर पठखनी देकर अपनी वापसी कर ली ।
2020 में पुन: विधानसभा का चुनाव होना है। ऐसे में भाजपा हर हाल में हर समीकरण को देख कर हीं बिहपुर से प्रत्याशी की घोषणा कर सकती है । बिहपुर विधानसभा चुनाव में जातीगत समीकरण का बहुत ज्यादा ध्यान रखा जाता है । यहाँ चुनाव के समय जातीगत समीकरण हावी रहते हैं । चूँकी यह भूमिहार बाहुल्य क्षेत्र जिसके कारण कुमार शैलेंद्र की दावेदारी पक्की मानी जाती है । पर राजनीत में कुछ भी स्थाई है यह कहना बेहद कठिन है । हलांकी शुशिल मोदी के करीबी माने जाने वाले कुमार शैलेंद्र का अपने क्षेत्रिय संगठन हीं नही प्रदेश संगठन में पकड़ अब बहुत कम हो गई है जिससे शत् प्रतिशत दावेदारी मानना बेहद मुश्किल है । हलांकी एक प्रकार के नीजी समर्थक भी इनके हैं जो हर तरह से इनके लिए हमेशा तैयार रहते हैं । परंतू भूमिहार वर्ग के कई कद्दावर नेतृत्व वर्ग इनसे 2015 से हीं इनसे नाराज चल रहे हैं और 2020चुनाव में भी इनकी नाराजगी यथावत रहेगी जो बेहद कमजोर करती है इनकी दावेदारी । दावेदारी का कमजोड़ होने का एक बड़ा कारण अपने दल के एक बड़े राजनेता से इनका पुराना विवाद भी माना जाता है।
2019 को लोकसभा चुनाव में जदयू ने बेहद रोचक राजनीत की और मंडल बनाम मंडल की लड़ाई करवा कर सत्ता हाथ ले ली । अब ऐसे में इस समीकरण को देखते हुए बिहपुर से शिंहकुंड निवासी भाजपा जिलाध्यक्ष विनोद मंडल की चर्चा दबे जुबान से शुरु हो चली है । विनोद मंडल बड़े शांत स्वभाव के राजनीतीज्ञ माने जाते हैं । पर इन्होंने अपना लोहा तब मनवाया जब दूसरी बार संगठन में इनको जिलाध्यक्ष नही बनाया जाए इसके लिए हर संभव प्रयाश के बावजूद जिलाध्यक्ष पद को बर्करार रखा । इस भाजपा जिलाध्यक्ष को भी भाजपा के कई कद्दावर नेताओं का समर्थन प्राप्त है ।
प्रत्याशीयों के दूसरे समीकरण में एक बड़ा चेहरा जिला पार्षद कुमकुम देवी भी है । एक हद तक इनके भी नीजी समर्थक भी हैं । पर इन पर चर्चा का दूसरा विषय महिला आरक्षण भी है । यदि सवर्ण और महिला आरक्षित प्रत्याशी की बात करें तो कुमकुम देवी दोनो हीं समीकरणों पर खड़ी उतरती दिखाई दे रही हैं ।
तीसरे समीकरण में आर.एस.एस और छात्र संगठन आता है जिसमें प्रो.भोला कुमर की उम्मीवारी होगी । आर.एस.एस की पकड़ मजबूत होना और आर.एस.एस के प्रति तत्परता इनके मनोबल को उँचा करती है और प्रबल दावेदार बनाती है । इसी
कड़ी का दूसरा हिस्सा भी है जिसमें सत्यप्रकाश झा का नाम आता है । नाम से हीं जाहिर है की ये ब्राह्मण समाज से आते है । सत्यप्रकाश झा एक प्रखर और बेवाक वक्ता के रुप में हीं नही सबसे पुराने संघी भी हैं । इनकी लोकप्रियता का राज भी यही है । कई बार प्रयाश कर चुके है प्रत्याशी बनने का पर भाजपा का दिल जितने के बावजूद टिकट नही मिल पाता है इन्हें । हलांकी इनका सामंजस्य भाजपा के हर कार्यकर्ता से इनका रहा है । इस बार भी ये दावेदारी मजबूती से रखने का प्रयाश करेंगे । ये नवगछिया भाजपा
जिला प्रवक्ता पद वर्तमान में सक्रिय हैं।
पार्टी में भाजपा पूर्व युवा मोर्चा के कार्यकारिणि सदस्य सह वर्तमान नगछिया जिला प्रवक्ता राजेश मणि भी एक हद तक प्रत्याशी होड़ में एक कोने में हैं । प्रखर प्रवक्ता और एक बड़े भाजपा राजनेता के करीबी भी माने जाते हैं । इनके चर्चा का कारण युवा वक्ता भी होना है पर पार्टी से इनके प्रत्याशी होने की संभावना बहुत कम है क्योंकी जातीगत समीकरण में ये कहीं नही बैठ पा रहे । ये इनका सबसे कमजोड़ पहलू भी है पर राजनीत में कुछ भी संभव है ।
बिहपुर ठाकुड़बाड़ी के महंथ सह नवगछिया भाजपा जिला उपाध्यक्ष महंथ नवल किशोर दास भी एक बड़े दावेदार के रुप में हो सकते हैं । राम मंदिर न्यास बोर्ड के अध्यक्ष के काफी करीबी माने जाते हैं । नजदीकीयों का कारण बिहपुर ठाकुरबाड़ी का अयोध्या में भी भागपुर मंदिर का होना है । बिहपुर विधानसभा के लगभग हर पंचायत में हर वर्ग के इनके शिष्य का होना बड़ी सहायक हो सकती है । शांत स्वभाव के इस इस दावेदार की अपनी अलग छवी है । माना जाता है की मुस्लिम समुदाय में भी इनकी बड़ी पकड़ है और 50% वोट का लाभ भी इनको मिल सकता है । इस बात का अंदाजा इस बात से भी लगाया जाता है की मुस्लिम बाहुल्य बिहपुर पंचायत होने के बावजूद में मुखिया एवं पैक्स पद इन्ही के हाथ वर्तमान में है । संगठन में अच्छी पकड़, कार्यकर्ताओं से सामंजस्य इनके मनोबल को उँचा करती है । कई साँसद एवं एक बड़े केंद्रिय मंत्री का मैत्रीवत संबंध इनकी दावेदारी को मजबूत करती है ।
अब इन सबसे पड़े एक रहस्य का भी भाजपा संगठन के भीतर भाजपा में घूम रहा है । यह रहस्य है एक मूक चेहरे का प्रत्याशी के रुप में बिहपुर से दावेदारी करना। यदि भाजपा में दावेदारी का विवाद गहराता है यह चेहरा सामने आ सकता है जिसको हर कार्यकर्ता का समर्थन प्राप्त है । पर ये रहस्य समयानूकूल हीं सामने लाया जा सकता है । और यह वह समय नही हैं पर चर्चा में आवस्य है ।
कुल मिला यह कहा जा सकता है की राजनीत में कुछ भी मुमकिन है और कुछ भी स्थाई नही ।

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